"अनकही बातें..."

मैने कभी ना कहा था के जिंदगी नाकाम रही मेरी
बस इतनी शिकायत है के मुक्कमल हो ना सकी

कुछ सहमी रही रातभर चांदनी किसी टुटे तारे को देखकर
बस चाहते हुवे भी अपनी जगह से हिल ना सकी

किताबो मे सुखे फुल आज भी बिते लम्हे याद दिलाते रहे
वो खुशबू उस मेहेक का एहसास फिर दिला ना सकी

हिसाब तो मांगा ही नही जिंदगी से सफर का
बस छालो का हिसाब कभी पांव को दिला ना सकी

गायत्री....मुळे

January 10 ,2015

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.दिवारे कितनी भी हो मजबूत
होती है अपनीही बनायी.....
बुनीयाद जिसकी शायद हो कच्ची
.....गिरने की भी मोहलत चाहीये

उम्र से खडी है इंतजार मे
वो दीवार उस शख्स के खातीर
झुलसती दोपहर मे कुछ पलोंकी
शायद ......उसे भी सहुलीयत चाहीये

सुकून था कितना खुद को
बचाने के बाद जमाने से
कोई खुद आके तोडे ये दीवार .
.......ऐसी भी शखसीयत चाहीये

चाहे हो कितना लंबा सफर
अपनी अपनी राहोंका
जुदा ना कर सके मंजीलोंसे कभी
 .........ऐसी भी हैसीयत चाहीये

हर कहीसुनी बात पे
करे वो ऐतबार बेशक चाहे
हर बिनकही बात का राज वो समझे
........ऐसी भी असलीयत चाहीये

बची हो बाते ...बाकी हो गिरहे ..
पडा रहे .पर्दा ..
बाकी रहेगा दिवार से रिश्ता ..
..बस .......दिल मे भी मासुमीयत चाहीये

....गायत्री ..मुळे ..

January 24 2015

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.........Gayatri S Muley
ना मंजीलो की हसरत...ना गुजरी राह का हिसाब
चलने का नाम है जिंदगी चाहे अधुरे हो ख्वाब
..
गायत्री.....

February 8
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Gayatri S Muley
Aaaa
एक वादा था एक दुजे से
याद आयी तो चांद से मिल लेंगे
आज क्या था बहाना
याद आये इसलिये चांद देखा
या चांद देखकर तुम्हे याद किया
चांद भी आजकल कुछ अधखीला रहता है
कुछ कशीश दिल मे छुपाये रखता है
कुछ लम्बी थी अमावस.की रात
कई सालो से चांद को इंतजार रहा
उन.प्यासी निगाहो का
चांद आया भी तो कैसे
एक बोझ ...एक कर्ज लिये मन मे
.
आज भी है चांद का कुछ वास्ता उन वादोंसे
उन ताकती निगाहों से .
एक था वादा...चांद को देखेंगे...जब जब याद करेंगे
शायद वो आज भी याद करते हो
लेकीन चांद आता ही ना हो उनके आसमान पर.
.........गायत्री........
February 10 2015

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:Gayatri S Muley
तरस जाते है जब दीदार ए यार को
आईने के सामने खुद को निहार लेते है....
....गायत्री....
February 13 2015


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 ना मुझसे फिर मिली
 ना बाद मे सवर पायी
वो तो मेरी जिंदगी थी
जो एक पल मे बिखर गयी.
.
जरा सी आहट क्या मिली
 कदमोंकी की उनके
वो तो मेरी जिंदगी थी
थम ने के बाद भी निखर गयी

कही छुटा था दामन
उन हसीन लम्हो का हात से
वो तो मेरी जिंदगी थी
उनके पिछे फिर ना जाने किधर गयी
..गायत्री...

February 16, 2015
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Gayatri S Muley

कही अनकही हर बात से
 कई सवाल कर लेते है
एक ही बात को.लेकर
 मन मे हजार जवाब पा लेते है

गुलशनसे समेटने है
खुशबू के हजारो महकते झोंके
मौसम के कई नजारे
बहारो से हासील कर लेते है

तरस जाते है जब
 दिदार-ए-यार को
आईने के सामने
खुद को निहार लेते है

शायद वो भी खडे हो
खुद को निहारते
सोचकर बेखुदी मे
खुदको संवार लेते है
..
सफर बेचैनी का कर गया
इस कदर आबाद मुझे
खामोश तनहाई के साथ
 राते आसानी से गुजार लेते है

सौ.गायत्री मुळे....

February 27, 2015
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Gayatri S Muley
या मिल जा तू मुझमे
या मिला दे मुझको खाक मे
कुछ ना रहे मेरा मुझ मे
मिटा दे मेरी ही हस्ती मेरे वजूद से
.
रुखसत हुए है उस गली से जब से
झुलसे है गुनगुनी धुप मे भी कई अर्से बेवजह बरसती बारीश की बुंदे
कई सावन बिते बादलोंको तरसे
.
या फिर मिल जा इस तरहा और
थाम ले दूर से ही हात मेरा
के चल पडे वक्त का हर लम्हा.
जो था कही बेवजह ठहरा
और थाम ले उन सुलगती शामों को
कुछ ख्वाब बोने के.लिये.मेरे आखो से
जो छुटे तो तुम्हारे साथ थे
लेकीन पराये मेरे हात से थे
या फिर रूक जा अब यही मेरे दिल
अब ना जगा कोई जुस्तजू
मिट चुके है पहलेही बहोत
तेरी दिदार की एक आरजू के लिये
गुजर रही थी गुजर जायेगी
एक जरासी जिंदगी थी
अब तक तुम्हारे खयालोंके साथ थी
अब खुद से भी जुदा हो जायेगी
..
गायत्री.
March 4 2015
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Gayatri S Muley
ना मंजील मिली ना रास्ता मिला
ना अंजामे-ए-उल्फत मे मेहेरबां मिला
बस एक तारा अपनी जगह से तुटा
और .......कारवा चल दिया
....
गायत्री

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Gayatri S Muley
बहोत आरजू थी नजरे मिलाये उनसे
एक उम्र गुजर गयी नजरे उठाते उठाते
.
गायत्री..
March 27 2015
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Gayatri S Muley
एक बेनामसा रिश्ता
उस रात सिसकिया ले रहा था
कुछ साल थे उसके पास बस
गिरवी रख्खे हुए उस जिंदगी के
और डोर बंधी थी उन लम्हो से
उलझता गया अपनेही आप मे
और ढुंडता रहा
उस बेनाम शख्स की परछाईयोंको
सिस्कियोंको जरुरत थी
उस कंधे की
जिसने उस रिश्ते का जनाजा कब का उठा लिया था
हिसाब बराबर था...उतनेही साल गुजरे थे शायद
मौसम ने हरतरफसे करवट बदली थी
और ..
कितनी आंधीयोंसे ...तुफानोसे बची हुई उस दिये की लौ
अब फडफडाती भी नही
क्यू की जिंदगी की उन गुमनान अंधेरो मे
अब सब खो गया है.
एक बेनाम सा रिश्ता कही एक.कोने मे पडा सिसकिया ले रहा था ..
.मैने देखा है
गायत्री ...
April 24 2015

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बहोत खुब रहेगा मेरा मिलना कयामत से
वो भी शायद सहम जाये देखकर इंतजार की हदे
......गायत्री
May 2 2015
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Gayatri S Muley
बेवजह बढते गये मेरे कदम उस शख्स की तरफ.
जिसे उम्रभर रास्तोंका खौफ सताता रहा
.
गायत्री..
May 20

मेरी खामोशी का ये मतलब नही के मै हार चुकी हू.
नजर से उतर गया वो.शख्स...जो कभी दिल.मे राज किया करता था


.गायत्री...

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Gayatri S Muley
उम्र का ये मोड
बडा अजीब होता है
गुजरे सालो का
हिसाब करीब होता है

देखो तो हाथ मे
कुछ नही होता
मांगने के लिये
खाली भी नही होता

फैलती है अपनीही
शाखाये चारो दिशाओमे
उन्हे अपने लिये रोके
ये हिसाब नही होता

नाम से लेकर बदलते है
खुदको जिनके लिये
मेरे किसी सवाल का
उनके पास जवाब नही होता

चाहते है बात करे किसीसे
पर सुनने को वक्त नही होता
ढल रही है जिंदगी अब शाम मे
उमीद का सवेरा नही होता

बढते है सब आगे की और
ये एक पल का बदलाव नही होता
आखिर जिंदगी है हमारी भी
कुछ पन्नो का किताब नही होता.

सौ .गायत्री मुळे....

December 28, 2013
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Gayatri S Muley
चलता रहा सिलसीला सालो जिस शख्स को जानने का
एक लम्हा हाथ से छुटा
उसने फिर अजनबी बना दिया.

कैसे शिकवा करे जिंदगि से
हर कदम पर एक सबक सिखा दिया.
तलाशते रहे दोस्त.
दुश्मनोने साथ निभाया

कहि कुछ छिन जाने का
अब डर हि भुला दिया.

एक छोटिसी हसरत ने
कहा से कहा लाकर बिखेर दिया
किसीके आखो का नुर बनना था
खुदकी नजर से भी उतार दिया

....गायत्री ....
December 22, 2013 at 8:35pm ·
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Gayatri S Muley
कुछ सालोंकी आदतोंको.
.कुछ पलोंसे फर्क नही पडता
बस...गुजारी थी...गुजर जायेगी...
अब यादोंसे ...कुछ फर्क नही पडता

शामे पहलेही तह्ना थी और भी गहरी हो गयी
कोई दिल से पेश करे साज.....कुछ फर्क नही पडता

गहरी थी रात की खामोशी....आज भी है रात खामोश
दूर जलते हो कुछ दिये...
अब फर्क नही पडता....

पता नही क्यु गुमसुम है ये बिखरती रात
सिमट जाये कही और किसी आगोश मे
अब फर्क नही पडता

सोचा था चलता रहेगा इंतजार...सदियों तक
अब कयामत भी आ जाये....कुछ फर्क नही पडता

गायत्री...

December 26, ----…



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Gayatri S Muley
एक उम्र गुजारी.है
उन बिते लम्हो मे
अब उन पलोंकी खामोशी
आजकल दस्तक दे रही है
कैद है जहा वो तनहाईया
कुछ सुलगते अरमानो के साथ
और बची खुची कुछ ख्वाईशे
जिंदा है अभी.....उन लम्होमे....
उन साथ गुजारे पलोंके एहसास का
बोझ सा है सीने पे धडकन का
बाकी है जरासा कर्ज
जो चुकाना बाकी है
उन साथ गुजारे लम्होंका.
जिसमे एक उम्र गुजारी है.
.....गायत्री.......

November 20, 2014
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Gayatri S Muley

बातों का सिलसीला चलता रहा जबतक उसका दर्द बयां होता रहा

मुस्कुराके दुनियादारी सिखा गया जब कहा कभी फुर्सत मे मुझे भी सुनो.
...गायत्री....


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Gayatri S Muley
बारामदे से से मैने कई बार
उस चांद को देखा..
जो खामोश नजरोसे
तुम्हे देख रहा था
कभी चांद से बाते की
और यादो मे तुम्हे पाया
जानती हु
जब कभी .......
तुम्हारी नजरे उस चांद से मिलेगी
कई सवाल उठेंगे लेकीन
वो बाते जान जाओगे...
जो कभी ना सुनाई थी
बदली से ढके चांद को
मैने कई बार रोते देखा है.
फिर सरकती रात की तरह...
चांद भी सरकता चला गया
उजाले की तरफ
रात की खामोशी
कुछ तन्हा थी
शायद बेजान थी
उसे भी डर था
शायद चांद को खो देने का
फिर गुजरती रात ने
थामे कुछ पल
भर लिया सपनोसे रात ने दामन
अब..... सुबह का है ..इंतजार
उस बारामदे को भी
कबसे
...गायत्री.......

August 23, 2014

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Gayatri S Muley
कोहरे से भरी राह हो
चाहे अकेली हो.
कभी तो धुंदले रस्ते बदल जायेंगे
हातो मे हात .....
हो ना हो.
साथ चलते जायेंगे......
हर कदम पर मंजील तो नही होती
पर रस्तोंसे पता पूछते रहना
कभी कुछ छुटे पल ही मिल जायेंगे
ना हमकदम है ना हमसफर
फिर भी कुछ है
सपनो का एक सा सलीका
कभी ना जिन्हे पाना है बस संजोके रखना है एक दुसरे के पलको पर
....
गायत्री......
August 20, 2014



.....................................................
ऐ जिंदगी...
अब तुकडो मे मिलना छोड दे
कांच की तरह बिखरे है हम
चुभनेसे पहले अपना रुख मोड ले
August 11, 2014


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Gayatri S Muley
कुछ अनकही बाते
कुछ अनकहे वादे
आहट तो बसी है दिल मे
बस कुछ पल चुन लेने दो
जो साथ हो हमने गुजारे
और एक कशीश रहने दो
कुछ हसरते है दिल मे बसी
उन्हे यु ही बिखेरने दो
कुछ अरमान है कब से
दिल मे बसे हुए
कुछ ख्वाईशे है साथ मे
सपने संजोये है पलकोपे
और है कुछ परछाईया
चलना है
उन रातो को लेकर साथ मे
जिनमे दबी है कुछ आहटे
जो ना कभी सुनाई किसीको
ना खुद मैने सुनी है
और फिर कुछ है
थोडीसी तनहाई
और कुछ लम्हे
जिन्हे जिंदा रख्खा है
उन हसीन पलो के लिये
'कभी आयेगी बहार
और फिर बदलेगा मौसम
फिर सावन आयेगा
फिर एकबार बरसेगी घटा '
और फिर डुब चलो उन लहरो मे.
उन सब अनकही बातो के साथ
कुछ फासला है
अभी बाकी
चंद लम्होंका
हो सके तो साथ चलकर तय कर ले
दामन मे समेटी है कुछ हसरते...तनहाई.
कुछ सिमटती सासे
थोडी खूशबू.............
कभी रोककर रखी थी सबसे छुपाकर
उसकी मेहक है वो भी ले चलू
उमडती लहरोंसे चुराकर कुछ बुंदे सेहज कर रख्खी है पलकोमे
भिगो दू तुम्हे उस गिली सिलवटो मे
और हो सके
तो चलो उस छोरतक
जहा हो मिलन धरती और अम्बर का
कुछ आवारा बादलोंको चलो ले चले साथ
और फिर एक घटा और एक बदली
उमडने दो कुछ बौछारे
और चली है दोनो बाहे
फैलाकर
धरती की कुछ तपती रगे
बरसने दो उन झुलसती दरारो मे
बन जाओ उस तपन की अंतीम सीमा
फिर बन जाओ नये सपनोंका सौदागर
गायत्री,,,,,,,,,,,
June 29, 2014

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Gayatri S Muley
सिमटकर रख देते है
अपनेही अंदर
वो बारात चांदनीकी
पता नही बेवजह
किसपे बरसने को मन करे.
.
...........गायत्री .........
April 18, 2014

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Gayatri S Muley
मेरी खामोशी का ये मतलब नही
के मै हार चुकी हू
बस नजर से उतर गया वो शख्स
जो दिल पे राज किया करता था
.
गायत्री ....
June 17
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Gayatri S Muley

कुछ अंजान रहा मेरा सफर
मेरा ही मुझसे इस कदर
खामोष रहे अल्फाज
और छुपा रहा मेरे हिस्से का डर
..
गायत्री
May 31  2015

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Gayatri S Muley
फितरत मे उसकी सिर्फ और सिर्फ थी खुदगर्जी
आया भी तो उसकी मर्जी गया भी तो उसकी मर्जी
.
....गायत्री...

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August 1 at 6:43pm


युं किनारा कर गई जिंदगी हर मोडपर मुझसे
के नब्ज टटोलती हू मै अब मोड आनेसे पहले.
गायत्री...
July 17


Gayatri S Muley
शाम की तन्हाई ....या तन्हाई की शाम
उम्र कट गयी... बस गुजरती नही शाम

....गायत्री.....
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सब वही है
वही नीम का पेड
वही चांद
वही गलीयारा
और
वही मै
और हां
वही फासला…………
बस कभी मिलोंसे था ……
………अब दिलो मे है
.....गायत्री .....
July 9 at 9:10pm

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